यह शरीर में अनेक तरह से उपयोगी है –
शरीर के सबसे छोटे इकाई या युनिट (unit) को सेल (cell, कोशिका) कहते हैं।
अरबों सेल को जोड़ कर हमारा शरीर बनता है।
हर सेल के बाहरी कवच चिकनाई युक्त होता है, जिससे कि उसका अस्तित्व रहता है। इस चिकनाई में 50 प्रतिशत कोलेसटेरोल होता है। यह खास करके हर सेल में पानी, अन्य पदार्थ और बिजली के आवहन को नियंत्रित करता है।
नसों (nerves) में यह दिमाग और शरीर के विभिन्न अंगों के बीच में सूचना का आदान प्रदान में खास महत्व रखता है।
कोलेसटेरोल, अनेक महत्वपूर्ण होरमोंस (hormones) के निर्माण में आवश्यक होता है। होरमोंस, शरीर में स्विच (switch) के जैसे काम करते हैं, मतलब कि शरीर के अनेक प्रक्रिया को शुरू या अंत (on – off) करते हैं, जैसे कि मासिक धर्म होना।
इसके अलावा कोलेसटेरोल, अनेक क्रियाशील पदार्थों का भी निर्माण करता है, जैसे कि -
सटेरोयड होरमोंस (Steroid Hormones) – यह शरीर में अनेक महत्वपूर्ण काम करता है, जैसे कि रक्तचाप और चीनी को नियंत्रित रखना।
अडरेनल होरमोंस (Adrenal Hormones) – यह शरीर में नमक – पानी का हिसाब रखता है।
विटामिन डी – जो कि हड्डीयों में केलशियम जमा करके, उसको मजबूत करता है।
बाईल एसिड जो चर्बी के पाचन में काम आता है।
कोलेसटेरोल के बिना जीवन संभव नहीं है, लेकिन अधिक कोलेसटेरोल जानलेवा भी होता है।
सोमवार, 17 अगस्त 2009
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