सोमवार, 17 अगस्त 2009

फेफड़ों और पेड़ में क्या संबंध है?

सांस लेने पर, हवा नाक से होते हुये, सांस कि नलियां द्वारा फेफड़ों तक पहुंचता है। सांस कि नलियों को समझने के लिये आप सोच सकते हैं किसी पेड़ के तरह। जैसे किसी पेड़ में एक मुख्य तना होता है, फिर विभाजित होकर शाखा निकलते हैं, और फिर अंगिनत विभाजन से अंगिनत छोटे-छोटे शाखा निकलते हैं, और उनसे टहनियां निकलते हैं, जिस पर अंत में पत्ते रहते हैं। पत्ते पेड़ को सांस लेने में मदद करते हैं। हर एक पत्ता, इस संगठन में सबसे छोटा युनिट या इकाई है। इस तरह के व्यवस्थापन से सांस लेने के लिय अंगिनत पत्ते, एक पेड़ को के मुख्य तना से लगे होते हैं। इन सभी सांस के नालियों के साथ अनगिनत खून के नालियां या रक्त वाहिकायें या blood vessel साथ में रहती हैं
फेफड़ों में खून की नालियां, © Obscura
ठीक उसी तरह, सांस लेने के सबसे छोटे युनिट को अलवियोलस (alveolus) कहते हैं। बहुत सारे अलवियोलस जुड़ कर बनते हैं अलवियोलाइ (alveoli)। ये जिस सांस के नली पर रहते हैं, उसे अलवियोलर डक्ट (alveolar duct)। कहते हैं। ये सारे हवा के आदान-प्रदान में काम आते हैं, जिससे कि शुद्ध हवा खून को मिलता है, और अशुद्ध हवा खून से बाहर निकलता है।
जैसे कि पत्तों के समूह को अंगिनत टहनियां और शाखा मुख्य तना से जोड़ते हैं, उसी तरह इन अलवियोलाइ को अंगिनत सांस लेने के नलीयां, मुख्य तने से जोड़ते हैं। इन सांस लेने के नलीयां को इस तरह से नाम दिया गया है, बड़ा से छोटा के क्रम में, ट्रेकिया, प्राइमरी ब्रोंकाइ, सेकंडरी ब्रोंकाइ, टरशीयरी ब्रोंकाइ, ब्रोंक्यिओल्स, अलवियोलर डक्ट, अलवियोलाइ और अलवियोलस। ट्रेकिया या व्हिंडपाईप (Trachea, windpipe) मुख्य सांस लेने के नली को कहा जाता है। फेफड़ों में करीब 23 बार सांस लेने के नलीयां का विभाजन होता है। इसका मतलब है कि एक से दो, दो से चार, चार से आठ, आठ से सोलह, और इस तरह 23 से 24 बार।

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