शरीर में दो फेफड़ा होता है। ये दोनो, हृदय के दोनो तरफ होते हैं और उसके साथ मिलकर काम करतेहैं। इसीलिये इन दोनो को एक साथ “कारडीयो-पलमोनेरी सिस्टम” या Cardio-pulmonary System कहा जाता है।
उदाहरण के लिये जैसे आपके रसोईघर में बिजली का पानी फिल्टर। आपके बटन दबाते ही, मशीन का मोटर चलता है और आपको फिल्टर्ड वाटर या साफ पानी मिलने लगता है। ठीक उसी तरह, आपका दिल, शरीर के खून को कुछ सेकंड के लिये फेफड़ा में ले जाता है। उतने ही देर में फेफड़ा, आपके शरीर के प्रदूषित खून को साफ खून में बदल देता है। यहां आपका दिल उसी मोटर के तरह है जो खून को पम्प करता है, और आपका फेफड़ा उसी फिल्टर के तरह है जो कि गंदे पानी को साफ पानी में बदल देता है।
शरीर में सेल (क़ोशिका या Cell) को जीवित रहने के लिये, निरंतर सांस लेना पड़ता है। इस क्रिया से उर्जा (energy) उत्तपन होता है, जिससे सेल का अस्तितव बना रहता है। इसमें सेल आक्सिजन गेस (oxygen) को अंदर लेता है, और सेल के पाचन क्रिया से उत्तपन कार्बन-डाइओक्साईड (carbon dioxide) को छोड़ देता है। यही जब आप करते हैं, तो उसको सांस लेना कहते हैं।
सेल से उत्तपन कार्बन-डाइओक्साईड और आक्सिजन कि कमी, खून को प्रदूषित करता है, क्योंकि यह सेल को सांस लेने में मद्द नहीं कर सकता है। आपका देह, फिर इस प्रदूषित खून को दिल के द्वारा, फेफड़ा क पास भेज देता है। वहां खून में से कार्बन-डाइओक्साईड निकाल कर, हवा में सांस छोड़ने पर शरीर से बाहर निकाला जाता है। साथ ही, सांस लेने पर, हवा का आक्सिजन गेस को खून में सोख लिया जाता है। सांस लेने को इंहेल (inhale) और सांस छोड़ने को एक्सहेल (exhale) कहा जाता है।
जब खून में कार्बन-डाइओक्साईड (carbon dioxide) का परिवर्तन होता है, तो खून के रसायन या केमिस्टरी (chemistry) पर भी असर पड़ता है। अधिक कार्बन-डाइओक्साईड से खून में तेजाब का मात्रा अधिक हो जाता है, और उलटे कार्बन-डाइओक्साईड के अत्याधिक कमी से खून में तेजाब का मात्रा अत्याधिक कम हो जाता है। इससे खून में अन्य रसायनों और विभिन नमक के मात्रा में बदलाव आ सकता है।
इस सभी क्रम में कहीं दिल या फेफड़ा के बीमारी के कारण अगर कोई रोकावट आता है, तो इससे खून प्रदूषित रहता है, और इससे शरीर के सभी सेल पर असर पड़ता है। सेल को सांस लेने में (cellular respiration), उर्जा उतपादन में (cellular energy production), खून के रसायन संतुलन में (blood chemistry balance), खून के तेजाबी संतुलन में (blood pH balance or hydrogen ion concentration) और सेल के जीवित रहने में (cell survival) दिक्कत हो सकता है।
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें