अपने घर के बगीचे में पाने पटाने के लिये आप अलग अलग पाईप रखे हैं। मान लिजीये कि किसी कारण से अगर कोई पाईप खराब हो गया तो बगीचे का कोई कोना को पानी मिलना बंद हो जायेगा। और अगर किसी और तरीके से पानी नहीं मिला तो घास मर जायेगा। ठीक उसी तरह से कोरोनेरी आरटेरी डिसइज़ होता है।
कोरोनेरी आरटेरी और उसके शाखा, दिल को खून पहुंचाते हैं। ये पाईप के जैसा होता है। शरीर में अधिक चिकनाई होने पर, अधिक फैट, कोरोनेरी आरटेरी और उसके विभिन्न शाखा पर जमने लगता है। यह सभी लोगों में बचपन से ही शुरू हो जाता है। अधिक चिकनाई युक्त खाना खाने से यह क्रम तेज हो जाता है। खून में बहते अनेक चीज और सेल, जैसे कि कैलशियम और प्रोटीन, इस चिकनाई में समाने लगते हैं और इसका आहिस्ता-आहिस्ता साईज बढते रहता है। इसको फिर पलाक कहते हैं, और उस रक्त वाहिका के क्रम को एथेरोस्कलेरोसिस (atherosclerosis) कहते हैं। इसको रक्त वाहिका का कड़ा होना या हारडेनिंग (Hardening of arteries) भी कहा जाता है।
समय के साथ पलाक का उपरी सतह, कवच के जैसा कड़ा हो जाता है। लेकिन अंदर से फिर भी नर्म रहता है। कभी-कभार उपरी कवच में दरार पर जाता है। इससे अंदूरनी चिकनाई उभर पड़ता है। इसपर खून जमने लगता है, और खून का थक्का बन जाता है। खून में उपस्थित अनेक प्रोटीन और पलेटलेट्स सेल के द्वारा यह होता है। यह थक्का अगर रक्त वहिका को पूरा जाम कर दिया तो तुरंत आगे के लिये खून का सप्प्लाई बंद हो जाता है, जिससे दिल का दौरा पड़ता है। ततकाल इलाज में एक दवा यह भी दिया जाता है जो कि खून को थक्का बनने से रोके या तुंरत बने हुये थक्का को गलाये और रक्त प्रवाह को फिर से स्थापित करे।
अगर बहुत समय से यह रुकावट बन रहा है, तो शरीर नये रक्त वहिका बनाता है, जो कि अतीरिक्त खून सप्पलाई करने के लिये होता है। उदाहरण के लिये अगर आपके बगीचे में कोई पाईप ठीक से काम नहीं कर रहा है, तो आप अतीरिक्त पाईप लगा दें। उसे “कोलेटरल सरकुलेशन” (collateral circulation) कहते हैं। यह सामान्य स्थिती में काम दे सकता है। लेकिन क्योंकि ये नये रक्त वाहिका पतले होते हैं, तो कभी बहुत मेहनत करने पर पूर्णरूप से खून नहीं पहुंचा पाते हैं।
कोरोनेरी आरटेरी के जाम होने से क्या हो सकता है? कोरोनेरी आरटेरी या उसके शाखा के पूर्ण जाम होने से अलग-अलग तरह के लक्षण हो सकते हैं। सभी को मिलाकर “कोरोनेरी सिंड्रोम” कहते हैं। ये तीन प्रकार के होते हैं -
अस्थायी दर्द होना या “अनस्टेबल एंजाइना” (unstable angina) – यह दिल में दर्द उठने का नया लक्षण होता है, जो कि पूरा दिल के दौरा में भी परिवर्तित हो सकता है। इसके लिये इलाज निहायत जरूरी है।
दिल के दौआ बगैर ई सी जी में बदलाव के – एंस्टेमी या NSTEMI (Non-ST segment elevation myocardial infarction) – यह हल्का हार्ट अटैक होता है, जिसमें कि ई सी जी के जांच में कोई फर्क नहीं दिखता है। लेकिन अन्य खून टेस्ट से पता चलता है कि दिल को जरा से नुकसान हुआ है। इस स्थिती में कोरोनेरी आरटेरी और उसके शाखा का थोड़ा रुकावट होता है। इसमें भी इलाज चाहिये।
दिल के दौआ के साथ ई सी जी में बदलाव – स्टेमी या STEMI (ST segment elevation myocardial infarction) – यह भारी हार्ट अटैक होता है, जिसमें कि ई सी जी के जांच में फर्क दिखता है, और अन्य खून टेस्ट से भी पता चलता है कि दिल को भारी नुकसान हुआ है। इस स्थिती में कोरोनेरी आरटेरी और उसके शाखा का पूर्ण रुकावट होता है। इसमें भी ततकाल इलाज चाहिये।
सोमवार, 17 अगस्त 2009
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